जुनून ए जन्नत

शहर भी है और है जहन्नम भी
देखना अब ये है के बचता है
आगबबुले धुएँका टावर,
माडर्न एजकी लिपीपुतीसी फर्माईशे
या तेरा जुनून ए जन्नत जुनून ए जन्नत वाचन सुरू ठेवा

जनमदिन

कल, मार्चकी दूसरी तारीखको मेरा जनमदिन था. मेरी उम्रमें इक साल और बढ गया कल. दिन गुजरते गुजरते मै कुछ लिख पाया… वहीं दो कवितायें एकसाथ यहां पोस्ट कर रहा हूं.

जनमदिन वाचन सुरू ठेवा

आपकी अधफिक्र नजर

बडी मुद्दत बाद मिले थे
तो बडे प्यारसे हमने हाथ
आपके कंधोपर हल्कासा रख दिया

आपकी अधफिक्र नजर वाचन सुरू ठेवा

मां

ना देखूं तेरी आंखोंमे
के दिखते है गठ्ठे खूनभरे
मां वाचन सुरू ठेवा

बूंदे

साधारणतः चुभते रहते है चीच पार्श्वभूमी. कदाचित तीच सेम कॅरेक्टर्स, तेच जोडपं. पुढची कविता… बूंदे वाचन सुरू ठेवा

चुभते रहते है

सामनेसे आती गाडियोंके हेडलाईटोंकी गर्म पिली रोशनी
ऐसे आखोंको चीर जाती है
चुभते रहते है वाचन सुरू ठेवा