क्रांती

क्रांती
जमानेसे कहदो कुछ होनेवाला है
आग तो लग चुकी है
जलाकर राख कर देनेवाली है
तितलियाँ बदल चुकी है बाझोंमे
बस अब आसमाँ छुनेवाली है
खून खौल उठा है युवकोंका
एक क्रांती होनेवाली है
जमानेसे कहदो कुछ होनेवाला है
शुरुआत हो चुकी है
अब सुलगना बाकी है
चाहे आ जाए सारे राक्षस
उन्हे मार डालेंगे हम
कलियुग अब जा चुका है
पर सत्ययुग आना बाकी है
जमानेसे कहदो क्रांती होनेवाली है
बुराई का अंधःकार हटाकर
अच्छाई की किरने लानेवाली है
जमानेसे कहदो क्रांती होनेवाली है
आतंक का महल जलाकर
शांती का कारवाँ लानेवाली है
ऐसी क्रांती होनेवाली है

मेरी यह कविता पढनेवाले मेरे सारे दोस्तोंसे यह रिक्वेस्ट है के, अगर कुछ ग्रॅमॅटिकल मिस्टेक्स अगर मुझसे हुई है तो मुझे माफ कर दिजीयेगा…

धन्यवाद

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